E25 पेट्रोल क्या है? E20 के बाद भारत में 25% एथनॉल फ्यूल की तैयारी, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर

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Ethanol blending in India: E20 पेट्रोल के बाद अब सरकार 25% एथनॉल वाले E25 पेट्रोल को लागू करने की तैयारी में है। जानें ऑटो कंपनियों के साथ बैठक और आपकी गाड़ी पर इसके असर की पूरी जानकारी।

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नई दिल्ली, 28 मार्चः केंद्र सरकार अब E20 पेट्रोल के बाद देश में E25 पेट्रोल (25% एथनॉल और 75% पेट्रोल का मिश्रण) लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और देश का पैसा बचाना है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में 100% स्वदेशी एथनॉल का इस्तेमाल एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। भारी उद्योग मंत्रालय और सायम (SIAM) के बीच इस बदलाव को लेकर अहम बैठक हुई है। साथ ही सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है। इस लेख में विस्तार से जानिए कि E25 के आने से आम आदमी, ऑटो इंडस्ट्री और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।


जब भी हम पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो दिमाग में सबसे पहला ख्याल तेल की कीमतों का आता है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती हैं कि विदेशों से आने वाला कच्चा तेल (Crude Oil) किस भाव पर मिल रहा है। लेकिन अब केंद्र सरकार इस निर्भरता को खत्म करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है।


देशभर में E20 पेट्रोल के बाद, अब सरकार की नज़र E25 पेट्रोल (पेट्रोल में 25% एथनॉल का मिश्रण) पर है। इसे लागू करने की संभावनाएं तलाशने के लिए सरकार ने देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल (वाहन) कंपनियों के साथ चर्चा का दौर शुरू कर दिया है। आइए इस पूरी खबर को आसान भाषा में समझते हैं और जानते हैं कि इससे आपकी ज़िंदगी पर क्या असर पड़ने वाला है।



E20 और E25 पेट्रोल आखिर है क्या?

अगर आप सोच रहे हैं कि ये E20 और E25 क्या बला है, तो इसे बिल्कुल सीधे शब्दों में समझिए। ‘E’ का मतलब है एथनॉल (Ethanol)।

  • E20 पेट्रोल: इसका मतलब है कि 1 लीटर फ्यूल में 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया गया है।
  • E25 पेट्रोल: इसमें 25 प्रतिशत एथनॉल और 75 प्रतिशत पेट्रोल होगा।


आपको बता दें कि वर्तमान में भारत के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध है। और सबसे बड़ी बात यह है कि अगले महीने से इसे पूरे देश में अनिवार्य (Mandatory) कर दिया जाएगा। यानी आपकी गाड़ी में जो पेट्रोल डलेगा, उसमें कम से कम 20% एथनॉल होना तय है। इसी सफलता को देखते हुए सरकार अब E25 की तरफ कदम बढ़ा रही है।


सरकार को क्यों लानी पड़ रही है E25 पॉलिसी?

इस सवाल का जवाब हमारी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में छिपा है।

  • कच्चे तेल पर हमारी निर्भरता: आज भी हमारा देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है (आयात करता है)। इसमें देश का अरबों डॉलर खर्च होता है।

  • अंतरराष्ट्रीय युद्ध और तनाव: इस समय पश्चिम एशिया (Middle East) में भयंकर तनाव और युद्ध की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।


  • स्वदेशी एथनॉल: दूसरी तरफ, एथनॉल का उत्पादन 100 प्रतिशत भारत में ही होता है। यह गन्ने, मक्के और खराब हो चुके अनाजों से बनता है। यानी अगर हम पेट्रोल में एथनॉल ज्यादा मिलाएंगे, तो हमें विदेशों से कच्चा तेल कम खरीदना पड़ेगा। इससे देश का पैसा देश में ही रहेगा और हमारे किसानों को भी सीधा फायदा मिलेगा।


  • वाहन कंपनियों की टेंशन: क्या हैं तकनीकी चुनौतियां?

सरकार का इरादा तो बहुत अच्छा है, लेकिन ऑटोमोबाइल कंपनियों के माथे पर थोड़ी चिंता की लकीरें हैं। जब फ्यूल में एथनॉल की मात्रा बढ़ती है, तो गाड़ी के इंजन में भी बदलाव करने पड़ते हैं।


वाहन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि E20 से सीधा E25 पर जाने में कई तरह की तकनीकी चुनौतियां (Technical Challenges) हैं। कंपनियों को नए नियमों (Regulations) को लेकर चिंता है। उन्हें इस बात का भी डर है कि अगर पुराने इंजनों में ज्यादा एथनॉल वाला पेट्रोल डाला गया, तो क्या गाड़ियों के पार्ट्स जल्दी खराब होंगे? क्या ग्राहकों की तरफ से शिकायतें बढ़ेंगी? इन सभी बातों को लेकर ऑटो सेक्टर में फिलहाल एक हलचल का माहौल है।


भारी उद्योग मंत्रालय और SIAM के बीच हुई अहम बैठक

इन चिंताओं को दूर करने और आगे का रास्ता निकालने के लिए शुक्रवार को भारी उद्योग मंत्रालय (Heavy Industries Ministry) के बड़े अधिकारियों ने 'सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स' (SIAM - सायम) के प्रतिनिधियों के साथ एक लंबी बैठक की।


सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा यही था कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 की जगह E25 पेट्रोल लाने की प्रक्रिया को कैसे व्यावहारिक (Feasible) बनाया जाए। इस सरकारी बैठक में आने से पहले, सायम से जुड़ी सभी बड़ी कार और बाइक कंपनियों ने आपस में भी इस मुद्दे पर गहरी आंतरिक चर्चा की थी।


फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) पर सरकार का बड़ा फोकस

मामला सिर्फ E25 तक सीमित नहीं है। सरकार भविष्य की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) शनिवार को एक और बड़ी बैठक करने जा रहा है। यह बैठक शुक्रवार वाली बैठक से बिल्कुल अलग है।


शनिवार की इस बैठक में सरकार का पूरा जोर ‘फ्लेक्स-फ्यूल' गाड़ियों पर होगा।

फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां क्या होती हैं? ये ऐसी एडवांस गाड़ियां होती हैं जिनका इंजन इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वह 20% से लेकर 85% या 100% तक एथनॉल वाले फ्यूल पर भी मक्खन की तरह चल सके।


पेट्रोलियम मंत्रालय इस बैठक में ऑटो कंपनियों को भारत में ज्यादा से ज्यादा फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके साथ ही, तेल कंपनियों (जैसे Indian Oil, Bharat Petroleum) को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे पेट्रोल पंपों पर इन गाड़ियों के लिए 'फ्लेक्स-फ्यूल' की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करें।


आम आदमी पर क्या होगा असर?

अब सबसे बड़ा सवाल जो हर आम हिंदुस्तानी के मन में आ रहा होगा कि "मेरी गाड़ी और मेरी जेब पर इसका क्या असर होगा?"

  • पेट्रोल की कीमतों पर कंट्रोल: अगर देश में विदेशी तेल का आयात घटेगा और सस्ता स्वदेशी एथनॉल इस्तेमाल होगा, तो भविष्य में पेट्रोल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं और आम जनता को महंगाई के झटके कम लगेंगे।


  • नई गाड़ियां खरीदना: आने वाले समय में जब आप नई गाड़ी खरीदने जाएंगे, तो आपको फ्लेक्स-फ्यूल वाले इंजनों के विकल्प ज्यादा मिलेंगे।


  • पर्यावरण को फायदा: पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से गाड़ियों से निकलने वाला जहरीला धुआं काफी हद तक कम हो जाता है। इससे हमारे शहरों की हवा साफ होगी।

 

कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार का यह कदम देशहित में एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। हां, यह सच है कि बदलाव के इस दौर में ऑटो कंपनियों को अपनी तकनीक अपग्रेड करने में थोड़ी मेहनत और निवेश करना होगा। लेकिन लंबे समय में E25 पेट्रोल और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम करेगी। E20 का सफर लगभग पूरा हो चुका है, और अब देश की रफ्तार E25 के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हो रही है।

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