लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। सरकार ने Make in India पहल के तहत घरेलू शिपबिल्डिंग को रफ्तार देने के लिए ₹70,000 करोड़ के बड़े निवेश की तैयारी कर ली है। इस फैसले से भारतीय शिपयार्ड कंपनियों के लिए आने वाले कई सालों तक कमाई के बड़े मौके खुल सकते हैं।
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। आइए जानते हैं कि इस बड़े कदम से किन तीन सरकारी डिफेंस कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
1) मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स | Mazagon Dock Shipbuilders - MDL
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारत सरकार की एक नवरत्न कंपनी है। यह देश का एकमात्र ऐसा सरकारी डिफेंस शिपयार्ड है, जिसे डेस्ट्रॉयर और पारंपरिक पनडुब्बियां बनाने में महारत हासिल है। इसकी क्षमता इतनी मजबूत है कि यह एक साथ 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बना सकती है।
कंपनी क्या बनाती है?
MDL सिर्फ सेना के लिए ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सेक्टर के लिए भी जहाज बनाती है।
- डिफेंस पोर्टफोलियो:
डेस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां, स्टील्थ फ्रिगेट, कॉर्वेट और मिसाइल बोट
- कमर्शियल पोर्टफोलियो:
कार्गो वेसल, टग, ड्रेजर, वाटर टैंकर और मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल
- ऑर्डर बुक और भविष्य
ऑयल और गैस सेक्टर में भी कंपनी की मजबूत पकड़ है। ONGC के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स कंपनी की कुल ऑर्डर बुक का करीब 18% हिस्सा हैं।
31 दिसंबर 2025 तक MDL की कुल ऑर्डर बुक ₹23,758 करोड़ थी। हालांकि यह FY21 के ₹49,700 करोड़ से कम है, लेकिन आने वाला समय कंपनी के लिए काफी मजबूत दिख रहा है।
आने वाले बड़े मौके
- Project-75I के तहत 6 नई पनडुब्बियां
- P-17B फ्रिगेट प्रोजेक्ट
- P-18 डेस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट
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NAVI MERCHANTS से ₹715 करोड़ का नया कॉन्ट्रैक्ट
वित्तीय प्रदर्शन
- रेवेन्यू: ₹9,156 करोड़
- ग्रोथ: 11%
- नेट प्रॉफिट: करीब ₹2,081 करोड़
2) गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स | Garden Reach Shipbuilders & Engineers - GRSE
GRSE रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी है। इसका मुख्य काम भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए युद्धपोत और सपोर्ट जहाज बनाना है।
ऑर्डर बुक और प्रोजेक्ट्स
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक ₹18,482 करोड़ थी। इसमें 10 प्रोजेक्ट और 42 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि ऑर्डर बुक का ₹20,000 करोड़ से नीचे आना कोई चिंता की बात नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि कंपनी तेज़ी से काम पूरा कर रही है।
कंपनी की कमाई का 77% हिस्सा सीधे डिफेंस प्रोजेक्ट्स से आता है, जिसमें P-17 Alpha फ्रिगेट प्रोजेक्ट का बड़ा योगदान है।
भविष्य की संभावनाएं
GRSE का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में डिफेंस और कमर्शियल सेक्टर में करीब ₹2.5 लाख करोड़ के नए ऑर्डर आ सकते हैं।
कंपनी ने ₹33,000 करोड़ के पांच जहाजों वाले प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली भी लगाई है। अगर यह डील FY26 के अंत तक पक्की होती है, तो कंपनी की ऑर्डर बुक ₹50,000 करोड़ के पार जा सकती है।
विस्तार की योजना
GRSE कोलकाता और गुजरात में नए प्रोजेक्ट लगा रही है। अभी कंपनी एक साथ 28 जहाज बना सकती है, जिसे 2026 तक 35 करने का लक्ष्य है।
वित्तीय प्रदर्शन
- रेवेन्यू: ₹4,883 करोड़
- ग्रोथ: 42%
- नेट प्रॉफिट: ₹445 करोड़
- प्रॉफिट ग्रोथ: 57%
3) कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड | Cochin Shipyard Limited - CSL
कोचीन शिपयार्ड भारत की एक और दिग्गज सरकारी कंपनी है। यह जहाज बनाने, उनकी मरम्मत करने और मरीन इंजीनियरिंग सेवाएं देने में माहिर है। डिफेंस और कमर्शियल, दोनों मोर्चों पर इसकी पकड़ मजबूत है।
कमर्शियल मार्केट में बड़ा मौका
भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग बाजार हर साल लगभग ₹12,000 से ₹15,000 करोड़ का अवसर पैदा करता है। अनुमान है कि 2047 तक भारतीय कंपनियां कुल 437 नए जहाज खरीदेंगी, जिनकी कीमत करीब ₹2.23 लाख करोड़ होगी। CSL इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विदेशी साझेदारी और तकनीक
CSL ने बेहतर तकनीक हासिल करने के लिए दक्षिण कोरिया की HD Hyundai Heavy Industries के साथ साझेदारी की है। इससे कंपनी LNG जैसे हाई-टेक जहाज बना सकेगी। भविष्य में कंपनी KSOE के साथ 50:50 पार्टनरशिप में नया शिपयार्ड बनाने की भी योजना बना रही है।
मजबूत ऑर्डर बुक
CSL की मौजूदा ऑर्डर बुक लगभग ₹23,000 करोड़ की है।
कंपनी को CMA से छह LNG-powered container ships बनाने का ₹3,240 करोड़ का ऑर्डर मिला है।
इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए पांच Next Generation Survey Vessels बनाने के ₹5,000 करोड़ के प्रोजेक्ट में भी कंपनी सबसे आगे है। अगर यह ऑर्डर मिलता है, तो कंपनी की ऑर्डर बुक ₹28,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।
वित्तीय प्रदर्शन
- रेवेन्यू: ₹3,093 करोड़
- ग्रोथ: 8%
- नेट प्रॉफिट: ₹427 करोड़
- प्रॉफिट में गिरावट: 23%
निवेशकों के लिए क्या संकेत है?
भारत का ₹70,000 करोड़ का शिपबिल्डिंग मिशन अब सिर्फ कागजों पर नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरता हुआ साफ दिख रहा है। इन तीनों कंपनियों के पास:
- मजबूत ऑर्डर बुक है
- उत्पादन क्षमता बढ़ रही है
- सरकारी सपोर्ट मौजूद है
यानी इन स्टॉक्स में लंबी अवधि का संभावित अवसर है। हालांकि, एक बात ध्यान रखने वाली है कि इन शेयरों में पहले से काफी तेजी आ चुकी है। इसलिए मौजूदा वैल्यूएशन पर खरीदारी करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है। समझदारी यही होगी कि इन स्टॉक्स को वॉचलिस्ट में रखें और बाजार में गिरावट या करेक्शन आने पर सही एंट्री की तलाश करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।

