रक्षा मंत्रालय का महा-फैसला: 2.38 लाख करोड़ के हथियार खरीद को मंजूरी, S-400 मिसाइल और Su-30 बढ़ाएंगे वायुसेना की ताकत

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Defence Ministry India: भारतीय सेना को और अधिक आधुनिक और घातक बनाने के लिए सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय ने देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपये के हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद को अपनी मंजूरी दे दी है। यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की एक अहम बैठक में लिया गया।


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नई दिल्ली, 27 मार्चः इस भारी-भरकम बजट से भारतीय वायुसेना के लिए S-400 मिसाइल सिस्टम, मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA), रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (ड्रोन) और सुखोई (Su-30) लड़ाकू विमानों के इंजनों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो, इस फैसले के बाद आसमान में भारत की ताकत इतनी बढ़ जाएगी कि कोई भी दुश्मन हमारी सरहदों की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि रक्षा मंत्रालय के इस फैसले से सेना की ताकत में कैसे और कितना इजाफा होगा।


DAC की बैठक और 2.38 लाख करोड़ का मेगा बजट

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) रक्षा मंत्रालय की वह सर्वोच्च संस्था है, जो सेना के लिए नए हथियारों और उपकरणों की खरीद पर अंतिम मुहर लगाती है। 2.38 लाख करोड़ का यह बजट इस बात का साफ संकेत है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। मौजूदा समय में दुनिया भर में जिस तरह के हालात हैं और भारत की सीमाओं पर जैसी चुनौतियां हैं, उसे देखते हुए सेना का आधुनिक होना बेहद जरूरी हो गया था। इस खरीद में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने पर किया गया है।


S-400 मिसाइल सिस्टम: हवा में ही खाक होंगे दुश्मन के मंसूबे

इस पूरी खरीद प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा S-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम (Surface-to-Air Missile System) की हो रही है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए S-400 को शामिल करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया है।

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क्यों खास है S-400?

यह सिस्टम दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों को पलक झपकते ही रोकने में सक्षम है। अगर दुश्मन का कोई लड़ाकू विमान, ड्रोन या बैलिस्टिक मिसाइल भारत के किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश करता है, तो S-400 उसे सैकड़ों किलोमीटर दूर हवा में ही नष्ट कर देगा। इसकी रडार प्रणाली इतनी एडवांस है कि यह स्टेल्थ (रडार से छिपने वाले) विमानों को भी ट्रैक कर सकता है। इस सिस्टम के आने से भारत के प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों के ऊपर एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार हो जाएगा।


पुराने विमानों की होगी विदाई, आएगा ‘मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट'

किसी भी युद्ध या आपातकालीन स्थिति में हथियारों और जवानों को एक जगह से दूसरी जगह तेजी से पहुंचाना सबसे अहम होता है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए भारतीय वायुसेना लंबे समय से मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की मांग कर रही थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।


बदलेगा वायुसेना का बेड़ा:

मंत्रालय के अनुसार, वायुसेना के पास मौजूद पुराने AN-32 और IL-76 परिवहन विमानों के बेड़े को अब धीरे-धीरे बदला जाएगा। इनकी जगह नए और आधुनिक मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लेंगे।

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क्या होगा फायदा?

इन नए विमानों के आने से सेना की रणनीतिक (Strategic), सामरिक (Tactical) और ऑपरेशनल एयरलिफ्ट जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। खास तौर पर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में, जहां भारी पेलोड के साथ उड़ान भरना मुश्किल होता है, वहां ये नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट गेम-चेंजर साबित होंगे। जवानों के लिए राशन पहुंचाना हो या युद्ध के समय भारी टैंक और तोपें एयरलिफ्ट करनी हों, यह काम अब चुटकियों में हो सकेगा।


बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान  

आज के समय में युद्ध लड़ने का तरीका पूरी तरह से बदल चुका है। अब आमने-सामने की जंग से ज्यादा जोर तकनीक और ड्रोन्स पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए DAC ने रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (Remotely Piloted Strike Aircraft) की खरीद को भी हरी झंडी दिखा दी है।


इनकी खासियत:

  • ये ऐसे एयरक्राफ्ट होते हैं जिनमें कोई पायलट नहीं बैठा होता, बल्कि इन्हें दूर बैठकर कंट्रोल रूम से ऑपरेट किया जाता है।
  • रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये एयरक्राफ्ट आक्रामक जवाबी कार्रवाई (Offensive Strikes) और समन्वित हवाई अभियानों को बेहद सटीकता के साथ अंजाम देने में मदद करेंगे।
  • इसके अलावा, ये स्टेल्थ इंटेलिजेंस (खुफिया जानकारी जुटाना), निगरानी (Surveillance) और टोही (Reconnaissance) गतिविधियों को भी मजबूत करेंगे। दुश्मन की सीमा में बिना नजर में आए घुसना और वहां की सटीक जानकारी जुटाकर कंट्रोल रूम तक पहुंचाना इन एयरक्राफ्ट्स का मुख्य काम होगा।


Su-30 लड़ाकू विमानों में आएगी नई जान

सुखोई-30 (Su-30 MKI) भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। वायुसेना के पास इस समय बड़ी संख्या में सुखोई विमान मौजूद हैं, लेकिन लंबे समय से उड़ान भरने के कारण इनके इंजनों को अपग्रेड करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

रक्षा मंत्रालय ने Su-30 के एयरो इंजन (Aero Engines) और उसके एग्रीगेट्स के ओवरहॉल (Overhaul) के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

ओवरहॉल का मतलब है कि इंजनों को पूरी तरह से खोलकर उनकी मरम्मत की जाएगी और उन्हें नई और एडवांस तकनीक से लैस किया जाएगा।


मंत्रालय का कहना है कि इस अपग्रेड से सुखोई विमानों की सर्विस लाइफ (सेवा अवधि) काफी बढ़ जाएगी। इससे विमान हवा में ज्यादा समय तक रह सकेंगे और वायुसेना की जो भी ऑपरेशनल जरूरतें हैं, वे बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकेंगी।


कुल मिलाकर देखा जाए तो 2.38 लाख करोड़ की यह सैन्य खरीद सिर्फ कुछ हथियारों का सौदा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की एक मजबूत नींव है। S-400 से जहां हमारी हवाई सुरक्षा को कोई भेद नहीं पाएगा, वहीं नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हमारी लॉजिस्टिक ताकत को पंख लगाएंगे। रिमोटली पायलटेड ड्रोन्स हमें आधुनिक युद्ध तकनीक में आगे रखेंगे और सुखोई का अपग्रेड हमारी मारक क्षमता को बरकरार रखेगा। रक्षा मंत्रालय और राजनाथ सिंह का यह कदम साफ संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार, सतर्क और अत्याधुनिक है।

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