FII Selling in India 2026: आखिर क्यों बैंकिंग शेयरों से भाग रहे विदेशी निवेशक? जानिए किन सेक्टर्स में आ रहा नया पैसा

FII Selling in India:  भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का दौर जारी है। अप्रैल के अंत तक फाइनेंशियल सेक्टर से 11,700 करोड़ की निकासी हुई है। आखिर बैंक शेयरों पर दबाव क्यों है? बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव का बाजार पर क्या असर पड़ रहा है? इस रिपोर्ट में पढ़ें बिकवाली के बड़े कारण और उन सेक्टर्स की जानकारी जहाँ नया पैसा आ रहा है। पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें।


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नई दिल्ली, 7 मई: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से हलचल मची हुई है। खासकर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का व्यवहार भारतीय निवेशकों और एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बनाते दिख रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 के दूसरे पखवाड़े (16-30 अप्रैल) में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में जबरदस्त बिकवाली की है।


इस बिकवाली का सबसे बड़ा प्रहार बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ा है। हालांकि, बाजार का एक दूसरा पहलू यह भी है कि जहां एक तरफ कुछ सेक्टर्स से पैसा बाहर जा रहा है, वहीं कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बाजार में यह उठापटक क्यों हो रही है और निवेशकों को आने वाले समय में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।


बैंकिंग सेक्टर: 11,700 करोड़ की भारी निकासी

विदेशी निवेशकों ने अप्रैल के अंतिम 15 दिनों में फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंकिंग शेयरों से 11,700 करोड़ से अधिक की निकासी की है। यह आंकड़ा डराने वाला है क्योंकि बैंकिंग सेक्टर को किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिकवाली के पीछे मुख्य रूप से 'मार्क-टू-मार्केट' (MTM) घाटे का डर है।


दरअसल, मार्च और अप्रैल के दौरान सरकारी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) 7% के स्तर से ऊपर बनी रही। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो बैंकों के पास मौजूद सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) की कीमतों में कमी आती है, जिससे बैंकों के पोर्टफोलियो पर घाटे की संभावना बढ़ जाती है। इसे ही MTM लॉस कहा जाता है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रुपये को गिरने से बचाने के लिए बाजार में किए जा रहे हस्तक्षेप से लिक्विडिटी यानी नकदी की कमी हो गई है, जिससे बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।


IT, ऑयल और हेल्थकेयर पर भी दिखा दबाव

बिकवाली का यह सिलसिला केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं रहा। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में कई अन्य प्रमुख सेक्टर्स से भी भारी मात्रा में पैसा निकाला गया:


  • तेल और गैस सेक्टर: कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण इस सेक्टर से 3,351 करोड़ की निकासी हुई।


  • IT सेक्टर: वैश्विक मंदी की आहट और क्लाइंट्स के खर्च में कटौती के चलते IT शेयरों से 2,887 करोड़ निकाले गए।


  • हेल्थकेयर और कंज्यूमर सर्विसेज: इन क्षेत्रों से क्रमशः 2,445 करोड़ और 2,434 करोड़ के शेयर बेचे गए।


  • ऑटो और टेलीकॉम: ऑटो सेक्टर से 1,775 करोड़ और टेलीकॉम सेक्टर से 1,908 करोड़ की बिकवाली दर्ज की गई।


इन 4 सेक्टर्स में आया ‘फ्रेश पैसा'

इतनी भारी बिकवाली के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि विदेशी निवेशक भारत के 'ग्रोथ इंजन' माने जाने वाले कुछ सेक्टर्स पर अभी भी दांव लगा रहे हैं। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और बढ़ती बिजली की मांग ने इन सेक्टर्स को आकर्षक बना दिया है:


  • पावर सेक्टर (Power): ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने इसमें 4,956 करोड़ का निवेश किया है।

  • कैपिटल गुड्स (Capital Goods): विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास को देखते हुए इस सेक्टर में 4,667 करोड़ की खरीदारी हुई।

  • मेटल्स (Metals): वैश्विक बाजार में कमोडिटी की कीमतों में सुधार के कारण मेटल शेयरों में 2,416 करोड़ आए।

  • कंस्ट्रक्शन (Construction): रियल एस्टेट और सरकारी प्रोजेक्ट्स में तेजी की वजह से यहाँ 2,199 करोड़ का नया निवेश देखने को मिला है।


बिकवाली के 3 सबसे बड़े ट्रिगर

बाजार के जानकारों का कहना है कि विदेशी निवेशक बिना किसी ठोस कारण के पैसा नहीं निकालते। इस समय भारतीय बाजार से निकासी के 3 मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:


1. जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension):

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान-इजराइल के बीच का संघर्ष, वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों (जैसे सोना या डॉलर) की तलाश करने पर मजबूर कर रहा है। युद्ध जैसी स्थिति में जोखिम भरे बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालना एक सामान्य प्रक्रिया है।


2. $100 के पार कच्चा तेल (Crude Oil Prices):

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाने से भारत का व्यापार घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ने और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यह विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट को नकारात्मक बना देता है।


3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अभाव:

एक चौंकाने वाला कारण जो अब चर्चा में है, वह है भारत में AI के क्षेत्र में बड़े निवेश अवसरों की कमी। दुनिया भर के निवेशक इस समय ऐसी कंपनियों की तलाश में हैं जो AI क्रांति का नेतृत्व कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी भी AI से जुड़ी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की कमी है, जिसके कारण निवेशक अमेरिका जैसे अन्य बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।


साल 2026 में अब तक 2 लाख करोड़ की निकासी यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक फिलहाल 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की स्थिति में हैं। हालांकि, भारतीय घरेलू निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों के समर्थन ने बाजार को एक हद तक गिरने से संभाला है। यदि आप एक लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो बैंकिंग और IT जैसे सेक्टर्स में गिरावट को एक अवसर के रूप में देख सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में ग्लोबल फैक्टर्स और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखना बेहद जरूरी है।


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