
Novus Loyalty IPO Listing
नई दिल्ली, 25 मार्च: शेयर बाजार में किसी भी आईपीओ की लिस्टिंग का दिन निवेशकों के लिए उत्साह और उम्मीद लेकर आता है। हर किसी की नजर इस बात पर होती है कि शेयर लिस्टिंग के दिन कितना प्रीमियम देगा। लेकिन Novus Loyalty IPO के मामले में तस्वीर बिल्कुल उलट रही।
आज, 25 मार्च 2026 को जब कंपनी के शेयर BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुए, तो निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। शेयर की शुरुआत ₹146 यानी इश्यू प्राइस पर फ्लैट हुई, लेकिन इसके तुरंत बाद ही इसमें गिरावट आ गई और यह 5% लोअर सर्किट पर फिसल गया। इससे आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशकों को पहले ही दिन नुकसान उठाना पड़ा।
यह शुरुआत उन निवेशकों के लिए निराशाजनक रही, जिन्होंने इस लॉयल्टी और रिवॉर्ड सॉल्यूशंस कंपनी पर भरोसा जताया था। जहां आमतौर पर आईपीओ से मुनाफे की उम्मीद होती है, वहीं नोवस लॉयल्टी के शेयर ने पहले ही दिन मायूस कर दिया।
IPO को लेकर उम्मीदें थीं, लेकिन लिस्टिंग ने निराश किया
नोवस लॉयल्टी के आईपीओ में निवेशकों को बेहतर लिस्टिंग की उम्मीद थी, लेकिन ग्रे मार्केट से पहले ही कुछ कमजोर संकेत मिल रहे थे। शेयर ₹146 के इश्यू प्राइस पर ही लिस्ट हुआ और कुछ ही देर में गिरकर ₹138.70 के लोअर सर्किट तक पहुंच गया। इससे साफ हो गया कि बाजार ने इस स्टॉक को ठंडी प्रतिक्रिया दी है।
कितना बड़ा था IPO?
नोवस लॉयल्टी का ₹60.15 करोड़ का आईपीओ 17 मार्च से 20 मार्च 2026 तक खुला था। इसमें कंपनी ने:
- ₹48.18 करोड़ नए शेयर जारी करके जुटाए
- 8.20 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे गए, जिससे करीब ₹11.97 करोड़ मिले
कंपनी ने अपने शेयरों के लिए ₹139 से ₹146 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।
निवेशकों को कम से कम 2,000 शेयरों के लिए बोली लगानी थी, यानी ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग ₹2.92 लाख का निवेश करना पड़ा।
सब्सक्रिप्शन ठीक रहा, लेकिन उत्साह नहीं दिखा
आईपीओ को कुल मिलाकर 1.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जो किसी SME IPO के लिए बहुत मजबूत नहीं माना जाता।
श्रेणीवार स्थिति इस तरह रही:
- QIB: 1.38 गुना
- NII: 1.17 गुना
- Retail Investors: 1.82 गुना
कंपनी ने 16 मार्च 2026 को एंकर निवेशकों से ₹16.5 करोड़ भी जुटाए थे, लेकिन इसके बावजूद लिस्टिंग के दिन बाजार ने कोई खास भरोसा नहीं दिखाया।
कंपनी क्या करती है?
वर्ष 2011 में स्थापित Novus Loyalty एक टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनी है, जो अलग-अलग उद्योगों के लिए लॉयल्टी और रिवॉर्ड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कंपनी की सेवाएं फिनटेक, ई-कॉमर्स, सॉफ्टवेयर, बैंकिंग, FMCG और रियल एस्टेट जैसे कई सेक्टरों तक फैली हुई हैं।
इसका प्लेटफॉर्म ग्राहकों को अपने लॉयल्टी प्रोग्राम बेहतर तरीके से चलाने में मदद करता है। कंपनी मुख्य रूप से दो मॉडल पर काम करती है:
- Ready-to-use program model
- Customizable model
इसके समाधान वेब, मोबाइल ऐप और ऑफलाइन स्टोर्स के साथ भी आसानी से जुड़ जाते हैं। कंपनी के प्रोडक्ट्स में पॉइंट-बेस्ड रिवॉर्ड प्रोग्राम, कैशबैक सिस्टम, डिजिटल वाउचर, प्रमोशनल ऑफर्स और इवेंट-ट्रिगर कैंपेन शामिल हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस मजबूत रहा
लिस्टिंग के दिन भले ही शेयर ने निराश किया हो, लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार दिखा है।
शुद्ध मुनाफा
- FY2023: ₹55 लाख
- FY2024: ₹2.96 करोड़
- FY2025: ₹3.58 करोड़
कुल आय
कंपनी की आय में भी अच्छा बढ़त देखने को मिली है।
- FY2024: ₹73.61 करोड़
- FY2025: ₹104.63 करोड़
चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही
अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने:
- ₹5.80 करोड़ का शुद्ध मुनाफा
- ₹71.43 करोड़ की कुल आय दर्ज की
सितंबर 2025 तिमाही के अंत तक कंपनी के पास ₹6.64 करोड़ का रिजर्व और सरप्लस था। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का कारोबार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है, लेकिन बाजार ने लिस्टिंग के दिन इस पर भरोसा नहीं जताया।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
नोवस लॉयल्टी का IPO इस बात की याद दिलाता है कि हर मजबूत बिजनेस, जरूरी नहीं कि लिस्टिंग के दिन अच्छा रिटर्न दे। कंपनी की फंडामेंटल स्थिति ठीक दिखती है, लेकिन बाजार की भावनाएं हमेशा अलग दिशा में जा सकती हैं।
जो निवेशक लंबी अवधि के लिए सोचते हैं, वे कंपनी के प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं। लेकिन जिन्होंने लिस्टिंग गेन की उम्मीद में पैसा लगाया था, उनके लिए यह शुरुआत बेहद कमजोर रही। कुल मिलाकर, नोवस लॉयल्टी की कहानी यह बताती है कि सिर्फ अच्छे आंकड़े ही काफी नहीं होते, बाजार का भरोसा भी उतना ही जरूरी होता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।