साल 2026 भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों के कारण बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
साल के शुरुआती सिर्फ ढाई महीनों में ही भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 533 अरब डॉलर घट गया है। यह पिछले 15 सालों में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इससे पहले साल 2011 में पूरे वर्ष के दौरान लगभग 625 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।
कई देशों के बाजार से भी बड़ा है यह नुकसान
रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में आई 533 अरब डॉलर की गिरावट कई देशों के पूरे शेयर बाजार के आकार से भी ज्यादा है।
यह नुकसान पोलैंड, वियतनाम, फिनलैंड, नॉर्वे और मलेशिया जैसे देशों के कुल मार्केट कैप से भी बड़ा बताया जा रहा है। साल 2026 की शुरुआत में भारत में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 5.30 ट्रिलियन डॉलर था, जो अब घटकर 4.77 ट्रिलियन डॉलर से नीचे आ गया है।
वहीं BSE (Bombay Stock Exchange) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप रुपये के हिसाब से गिरकर करीब 429 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट के 3 मुख्य कारण
1. अमेरिका का टैरिफ फैसला
अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ नियम (US Tariff Policy) का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। इससे कई कंपनियों के इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ गया है।
2. ईरान-इजराइल युद्ध
मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजराइल युद्ध (Iran Israel War) ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है।
3. AI और IT सेक्टर पर दबाव
Artificial Intelligence (AI) सेक्टर में आ रहे बदलाव और चुनौतियों का असर भारतीय IT कंपनियों पर भी पड़ा है। इस वजह से IT सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिल रही है, जिसने पूरे बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।
आगे शेयर बाजार के सामने क्या खतरे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-इजराइल युद्ध लंबा चलता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। इसका सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
2026 में अब तक बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में लगभग 10% की गिरावट आ चुकी है। विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर होने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और बाजार की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
