शेयर बाजार और कमोडिटी में निवेश करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। फरवरी महीने में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में निवेश की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी की तुलना में फरवरी में गोल्ड ETF में निवेश करीब 78% घटकर 5,254 करोड़ रुपये रह गया।
वहीं दूसरी तरफ चांदी से जुड़े सिल्वर ETF में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। यही वजह है कि करीब 27 महीनों में पहली बार सिल्वर ETF से 826 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई है।
जनवरी की तुलना में निवेश कम, लेकिन सालभर में बढ़ोतरी
Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में गोल्ड ETF में लगभग 24,039 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। लेकिन फरवरी में यह आंकड़ा घटकर 5,254 करोड़ रुपये पर आ गया।
हालांकि अगर पिछले साल के फरवरी महीने से तुलना करें, तो इस साल निवेश में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले साल फरवरी में गोल्ड ETF में 1,979 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जबकि इस साल यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। यानी सालाना आधार पर निवेश में लगभग 165% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्यों कम हुआ निवेश?
बाजार के जानकारों के मुताबिक निवेश में आई इस कमी के पीछे सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली (Profit Booking) है। जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो कई निवेशक अपने पुराने निवेश से मुनाफा निकाल लेते हैं। इसके अलावा निवेशक समय-समय पर अपने निवेश पोर्टफोलियो को री-बैलेंस (Rebalancing) भी करते हैं, जिसका असर ETF के इनफ्लो और आउटफ्लो पर दिखाई देता है।
सोने पर निवेशकों का भरोसा बरकरार
फरवरी में निवेश की रफ्तार भले ही धीमी पड़ी हो, लेकिन गोल्ड ETF में अभी भी पॉजिटिव इनफ्लो बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों का भरोसा सोने पर अभी भी कायम है। फरवरी के दौरान देश में कुल 25 गोल्ड ETF स्कीमें सक्रिय थीं। गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जनवरी के 1.84 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा घटकर फरवरी में 1.83 लाख करोड़ रुपये रह गया।
सिल्वर ETF से 27 महीने बाद पैसा बाहर
सोने के साथ-साथ चांदी में भी पिछले महीने बड़ी हलचल देखने को मिली। फरवरी में सिल्वर ETF से कुल 826 करोड़ रुपये की नेट निकासी हुई। यह पिछले 27 महीनों में पहली बार हुआ है जब सिल्वर ETF में आउटफ्लो दर्ज किया गया।
आंकड़ों के अनुसार फरवरी में सिल्वर ETF में 4,628 करोड़ रुपये का निवेश आया, लेकिन उसी दौरान निवेशकों ने 5,455 करोड़ रुपये निकाल लिए। इसी वजह से कुल मिलाकर 826 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो रिकॉर्ड किया गया।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि ETF में होने वाला यह उतार-चढ़ाव बाजार की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। निवेशक अक्सर मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो संतुलन के कारण ऐसे फैसले लेते रहते हैं। हालांकि, लंबे समय के निवेश के नजरिए से देखें तो सोना और चांदी दोनों ही निवेश के लोकप्रिय विकल्प बने हुए हैं।
