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नई दिल्ली, 8 अप्रैल: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। इस फैसले से फिलहाल होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज़ की ईएमआई में किसी तरह की बढ़ोतरी की आशंका नहीं है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के बाद कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय पश्चिम एशिया में तनाव, सप्लाई चेन की चुनौतियों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी मुश्किलों से गुजर रही है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
गवर्नर ने वित्त वर्ष 2027 के लिए रिटेल महंगाई का अनुमान 4.6 फीसदी और कोर महंगाई का अनुमान 4.4 फीसदी बताया है। हालांकि, दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए महंगाई के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी की गई है।
आरबीआई के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है। 3 अप्रैल तक भारत का फॉरेक्स रिज़र्व 697 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो करीब 11 महीने के आयात को संभालने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। इससे देश की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।
बैठक में बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने और एमएसएमई सेक्टर के लिए ऑनबोर्डिंग नियमों को आसान बनाने जैसे कदमों का भी संकेत दिया गया। आरबीआई का कहना है कि छोटे कारोबारियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना अब और आसान बनाया जाएगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
आरबीआई के इस फैसले का सबसे सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता है। रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकों पर कर्ज की लागत नहीं बढ़ती, जिससे लोन की ब्याज दरों में बड़ा बदलाव नहीं आता। यानी जिन लोगों ने होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लिया है, उनके लिए यह फैसला फिलहाल राहत भरा है।
महंगाई को लेकर क्या संकेत हैं?
आरबीआई का कहना है कि आने वाले समय में महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। ग्लोबल सप्लाई चेन की रुकावटें और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी भारतीय बाजारों पर दबाव बना सकती हैं। फिर भी घरेलू मांग, शहरी खपत और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती भारत की ग्रोथ को सहारा दे रही है।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार बना भरोसे का आधार
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्तर पर है। यह स्थिति देश को किसी भी बाहरी संकट, आयात दबाव या अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता से बचाने में मदद करती है। इससे रुपये में स्थिरता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
MSME और बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत
आरबीआई ने छोटे और मध्यम उद्योगों को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया है। एमएसएमई के लिए ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की बात कही गई है, ताकि नए और छोटे व्यवसाय आसानी से बैंकिंग सेवाओं से जुड़ सकें। साथ ही बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, 8 अप्रैल की आरबीआई एमपीसी बैठक ने यह साफ कर दिया कि केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है। एक तरफ जहां रेपो रेट को स्थिर रखकर आम लोगों को राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता पर भी मजबूत फोकस बनाए रखा गया है।
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