भारतीय शेयर बाजार इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। मार्च 2026 में अब तक फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने करीब 88,180 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए हैं। इस बड़ी निकासी ने छोटे निवेशकों से लेकर बड़े खिलाड़ियों तक की चिंता बढ़ा दी है।
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| FPI Selling |
बाजार में लगातार बिकवाली, निवेशकों की बढ़ी टेंशन
पिछले कुछ समय से Sensex और Nifty दोनों ही दबाव में नजर आ रहे हैं। हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शेयर बेच रहे हैं और बाजार में नया पैसा नहीं आ रहा।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2026 की शुरुआत से ही 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। यह ट्रेंड बाजार के लिए चिंता का संकेत है।
क्यों हो रही है इतनी बड़ी बिकवाली?
इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण हैं, जिनका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ रहा है।
Middle East तनाव और तेल की कीमत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और लागत बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 92 के स्तर तक गिर गया है। कमजोर रुपये के कारण विदेशी निवेशकों को रिटर्न कम मिलता है, जिससे वे बाजार से पैसा निकालना बेहतर समझते हैं।
🇺🇸 अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों को सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में वे भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर रुख कर रहे हैं।
फरवरी से मार्च: एकदम उलटी तस्वीर
दिलचस्प बात यह है कि फरवरी 2026 में स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय विदेशी निवेशकों ने करीब 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
लेकिन मार्च में अचानक हालात बदल गए और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट पूरी तरह ग्लोबल कारणों से जुड़ी हुई है।
- बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव
- महंगा कच्चा तेल
- कमजोर रुपया
- अमेरिकी बॉन्ड का आकर्षण
इन सभी कारणों ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है।
पहले भी हो चुकी है भारी बिकवाली
यह पहली बार नहीं है जब बाजार में इतनी बड़ी बिकवाली देखी गई हो।
- जनवरी 2026: 35,962 करोड़ निकासी
- दिसंबर 2025: 22,611 करोड़
- नवंबर 2025: 3,765 करोड़
हालांकि, अक्टूबर 2024 में 94,017 करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली अब भी सबसे बड़ी रही है।
क्या करें निवेशक?
इस समय बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है। जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
ऐसे में निवेशकों को घबराने की बजाय
- लंबी अवधि की सोच रखनी चाहिए
- मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए
- और बाजार में स्थिरता का इंतजार करना चाहिए
