देश में इन दिनों कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की भारी कमी की खबरों ने फूड सर्विस सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है। गैस की सप्लाई प्रभावित होने का असर सीधे तौर पर रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों पर पड़ रहा है। इसी वजह से शेयर बाजार में Zomato, Swiggy, Jubilant FoodWorks और Devyani International जैसी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली है।
अगर आपके निवेश पोर्टफोलियो में भी फूड सेक्टर से जुड़े शेयर हैं, तो यह खबर आपके लिए काफी अहम हो सकती है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और इसका असर किन कंपनियों पर पड़ रहा है।
इन कंपनियों के शेयरों पर पड़ा सीधा असर
जैसे ही कमर्शियल LPG की कमी की खबर बाजार में फैली, निवेशकों के बीच घबराहट फैल गई। नतीजा यह हुआ कि फूड डिलीवरी और क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। जिन कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, उनमें शामिल हैं:
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Jubilant FoodWorks
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Devyani International
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Zomato
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Swiggy
इन कंपनियों का कारोबार काफी हद तक रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स पर निर्भर करता है, इसलिए गैस की कमी की खबर आते ही बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया।
शेयरों में गिरावट की असली वजह
दरअसल, देश के कई हिस्सों में कमर्शियल LPG गैस की सप्लाई प्रभावित हो गई है। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने तो साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करने पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में अगर रेस्टोरेंट और होटल बंद हो जाते हैं, तो Swiggy और Zomato जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को ऑर्डर मिलना भी कम हो जाएगा। यही डर निवेशकों को सताने लगा और उन्होंने इन कंपनियों के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसके चलते बाजार में गिरावट देखने को मिली।
जमीनी स्तर पर क्या है स्थिति?
देश के कई बड़े शहरों में रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी बढ़ गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बेंगलुरु के रेस्टोरेंट एसोसिएशनों ने बताया है कि गैस की कमी के कारण कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। National Restaurant Association of India (NRAI) के अनुसार, कई रेस्टोरेंट्स के पास अब केवल एक हफ्ते की गैस बची है। अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो रेस्टोरेंट्स को मेन्यू में कटौती करनी पड़ेगी या फिर पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा. NRAI ने इस स्थिति को “विनाशकारी बंदी” जैसा बताते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
आखिर क्यों पैदा हुई LPG की किल्लत?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 5 मार्च को जारी हुए एक सरकारी आदेश से मानी जा रही है। सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता दें। हालांकि इस आदेश की भाषा को लेकर डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच भ्रम पैदा हो गया। कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कमर्शियल गैस की डिलीवरी ही रोक दी। बेंगलुरु में तो 9 मार्च से कमर्शियल LPG की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। यह स्थिति इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि कुछ समय पहले तक कंपनियों का दावा था कि देश में 70 दिनों तक LPG की पर्याप्त उपलब्धता है।
सरकार का क्या है प्लान?
इस संकट के बीच सरकार की तरफ से कुछ राहत भरी खबर भी सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत अब United States और Canada से अतिरिक्त LPG मंगाने की कोशिश कर रहा है। सरकार का कहना है कि कमर्शियल LPG पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का इरादा नहीं है। लेकिन आम जनता को मिलने वाली घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता देना जरूरी है। स्थिति को संभालने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विशेष पैनल भी बनाया है। यह पैनल रेस्टोरेंट और ऑटो सेक्टर की जरूरतों को समझकर जल्द से जल्द गैस सप्लाई बहाल करने पर काम करेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
फिलहाल फूड सर्विस सेक्टर थोड़े मुश्किल दौर से गुजर रहा है। जब तक LPG की सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक Swiggy, Zomato और QSR सेक्टर के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि इस सेक्टर में नया निवेश करने से पहले सरकार के अगले कदम और गैस सप्लाई की स्थिति पर नजर जरूर रखें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले हमेशा किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना जरूरी है।
