Nifty 50 IT Sector Weightage: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में निवेश करने वालों के लिए, और खास तौर पर उन लोगों के लिए जो टेक्नोलॉजी शेयरों के दीवाने हैं, एक चिंताजनक खबर सामने आई है। देश के सबसे बड़े इंडेक्स यानी Nifty 50 में आईटी सेक्टर (IT Sector) की पकड़ अब तक के सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। ताजा आंकड़ों ने बाजार के दिग्गजों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और एचसीएल टेक (HCLTech) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आई भारी गिरावट का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
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हालात ये हैं कि निफ्टी 50 में आईटी सेक्टर का वेटेज गिरकर 26 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह गिरावट सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि यह बताता है कि बाजार का मूड आईटी कंपनियों को लेकर कितना बदल चुका है।
26 साल पुरानी यादें ताजा: 1999 के स्तर पर पहुंचा आईटी
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन जब कोई सेक्टर 26 साल पीछे चला जाए, तो यह बड़ी खबर बन जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी 50 इंडेक्स में आईटी सेवाओं का कुल वेटेज (Weightage) घटकर महज 8.8 प्रतिशत रह गया है।
इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं:
- मार्च 2024: पिछले साल मार्च के अंत तक यह हिस्सेदारी 11.7 प्रतिशत थी।
- मार्च 2021 (महामारी का दौर): कोरोना काल में जब पूरी दुनिया डिजिटल हो रही थी, तब आईटी सेक्टर का वेटेज अपने पीक पर यानी 16.2 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
- मार्च 1999: आज का स्तर (8.8%) मार्च 1999 के बाद सबसे कम है। उस समय आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी सिर्फ 7.1 प्रतिशत हुआ करती थी।
यह वो दौर था जब आईटी सेक्टर ने निफ्टी 50 में अपनी जगह बनानी शुरू ही की थी। 1998 के दूसरे हिस्से में पहली बार Infosys और NIIT जैसी कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया गया था। आज की तारीख में निफ्टी 50 में कुल 5 आईटी कंपनियां शामिल हैं, लेकिन उनका सम्मिलित प्रभाव (combined influence) लगातार कम हो रहा है।
ऑयल एंड गैस सेक्टर ने मारी बाजी, IT खिसका तीसरे नंबर पर
शेयर बाजार में जो सेक्टर परफॉर्म करता है, उसका राज चलता है। आईटी सेक्टर की सुस्ती का फायदा दूसरे सेक्टर्स ने उठाया है। अब आईटी सेक्टर निफ्टी 50 में 'दूसरे' सबसे बड़े योगदानकर्ता का ताज गंवा चुका है और तीसरे स्थान पर खिसक गया है।
आईटी सेक्टर को पीछे छोड़कर अब ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) सेक्टर दूसरे नंबर पर आ गया है। इस सेक्टर में Reliance Industries जैसी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी शामिल है।
- ऑयल एंड गैस की हिस्सेदारी: 9.2 प्रतिशत
- आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी: 8.8 प्रतिशत
हालांकि, पिछले साल मार्च में ऑयल एंड गैस की हिस्सेदारी 9.8 प्रतिशत थी, लेकिन आईटी में आई भारी गिरावट के कारण यह सेक्टर अब आईटी से आगे निकल गया है।
नंबर 1 पर कौन है?
अगर आप सोच रहे हैं कि नंबर 1 पर कौन है, तो वह ताज अभी भी बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज (BFSI) के पास है। बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का दबदबा कायम है। निफ्टी 50 में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 36.5 प्रतिशत हो गई है, जो एक साल पहले 35.6 प्रतिशत थी। यानी बाजार की चाल अब मुख्य रूप से बैंक और फाइनेंस कंपनियां तय कर रही हैं।
दिग्गज आईटी शेयरों का हाल: Infosys और TCS का योगदान
निफ्टी 50 में किसी भी सेक्टर का वेटेज उसकी कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। आईटी सेक्टर की गिरावट के पीछे इसकी दिग्गज कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन मुख्य कारण है। निफ्टी में शामिल पांच आईटी कंपनियों में सबसे ज्यादा वेटेज Infosys का है।
Infosys: इसका वेटेज 3.97 प्रतिशत है।
Tata Consultancy Services (TCS): देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी होने के बावजूद, फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के आधार पर इंडेक्स में इसका वेटेज 2.27 प्रतिशत है।
इन दोनों कंपनियों के शेयरों में पिछले कुछ समय में सुस्ती देखी गई है, जिसका सीधा असर पूरे इंडेक्स पर पड़ा है। जब ये 'हाथी' नहीं चलते, तो पूरा आईटी इंडेक्स रेंगने लगता है।
बाजार की तुलना में बहुत पीछे छूटा IT सेक्टर
मौजूदा वित्त वर्ष (2025-26) आईटी निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। अगर हम व्यापक बाजार (Broader Market) से तुलना करें, तो आईटी शेयरों का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है।
निफ्टी 50 बनाम निफ्टी आईटी
गिरावट का दौर: निफ्टी आईटी इंडेक्स (जो देश की टॉप 10 आईटी कंपनियों को ट्रैक करता है) पिछले साल मार्च के अंत से अब तक करीब 11.4 प्रतिशत गिर चुका है।
बाजार की चाल: इसके ठीक उलट, इसी अवधि में निफ्टी 50 इंडेक्स में 8.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।
यह अंतर साफ बताता है कि जहां बाकी बाजार पैसा बना रहा है, वहीं आईटी सेक्टर निवेशकों की पूंजी को कम कर रहा है।
कैलेंडर ईयर का हाल
अगर हम इस साल की शुरुआत से देखें, तो हालात और भी खराब नजर आते हैं:
- निफ्टी आईटी इंडेक्स में 13.7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है।
- जबकि निफ्टी 50 में केवल 2.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई है।
दिसंबर 2024 के अंत में निफ्टी आईटी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) 43,338 पर था। आज की तारीख में यह उस शिखर से लगभग 26 प्रतिशत नीचे गिर चुका है। वहीं, निफ्टी 50 अपने रिकॉर्ड हाई से सिर्फ 2.8 प्रतिशत ही नीचे है। यह डेटा साफ करता है कि बाजार में जो थोड़ी-बहुत नरमी है, उसका सबसे बड़ा कारण आईटी सेक्टर ही है।
शुक्रवार का सत्र: मंदी के संकेत
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
- Nifty IT Index: 1.44 प्रतिशत गिरकर 32,681 के स्तर पर बंद हुआ।
- Nifty 50: 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,478.9 पर बंद हुआ।
- यह लगातार गिरावट निवेशकों के आत्मविश्वास को हिला रही है।
महामारी (Pandemic) के बाद की तेजी पूरी तरह खत्म
आपको याद होगा 2020 और 2021 का वह दौर, जब कोरोना महामारी के दौरान दुनिया घरों में बंद थी। उस समय हर चीज ऑनलाइन हो रही थी। क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सर्विसेज और ऑटोमेशन की मांग आसमान छू रही थी। इसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को मिला था।
2011 से 2019 तक: निफ्टी आईटी और निफ्टी 50 लगभग एक ही रफ्तार से चल रहे थे। दोनों ने करीब 120 प्रतिशत का रिटर्न दिया था।
महामारी का बूम (2020-2021)
मार्च 2020 से दिसंबर 2021 के बीच एक बड़ा बदलाव आया:
- Nifty IT Index: इसमें 203 प्रतिशत का भारी उछाल आया।
- Nifty 50: इसमें 102 प्रतिशत की बढ़त हुई।
यानी उस समय आईटी सेक्टर बाजार से दोगुनी रफ्तार से भाग रहा था। लेकिन अब कहानी पूरी तरह पलट चुकी है।
बूम के बाद का बस्ट:
- दिसंबर 2021 के बाद से माहौल बदल गया है।
दिसंबर 2021 से अब तक निफ्टी आईटी इंडेक्स में 16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। वहीं, इसी दौरान निफ्टी 50 ने 47 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि महामारी के दौरान आईटी सेक्टर ने जो "अतिरिक्त रिटर्न" (Alpha) कमाया था, वह अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। अब आईटी सेक्टर वापस उसी पटरी पर आ गया है जहां वह महामारी से पहले था, या शायद उससे भी खराब स्थिति में।
ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन (Global Slowdown): भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप से आता है। वहां मंदी की आहट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने अपने खर्चों में कटौती की है।
आईटी बजट में कटौती: विदेशी क्लाइंट्स अब नए प्रोजेक्ट्स पर पैसा खर्च करने से बच रहे हैं। वे "Wait and Watch" (रुको और देखो) की नीति अपना रहे हैं।
सतर्कता और देरी: जो डील्स पहले जल्दी क्लोज हो जाती थीं, अब उनमें लंबा वक्त लग रहा है। निर्णय लेने में देरी हो रही है।
आय वृद्धि पर दबाव: इन सब कारणों से टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों की आय वृद्धि (Revenue Growth) धीमी पड़ गई है। मार्जिन पर भी दबाव है। यही वजह है कि भारतीय आईटी क्षेत्र अपने इतिहास के सबसे लंबे और बड़े 'अंडरपरफॉर्मेंस' (Underperformance) के दौर से गुजर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जो निवेशक लंबे समय से आईटी शेयरों में बने हुए हैं, उनके लिए यह समय धैर्य की परीक्षा लेने वाला है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था में सुधार के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक आईटी सेक्टर में भारी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि वैल्युएशन अब थोड़े आकर्षक हो रहे हैं, लेकिन बाजार का सेंटीमेंट अभी भी आईटी के खिलाफ ही नजर आ रहा है। निफ्टी 50 में वेटेज का गिरना यह दर्शाता है कि बड़े फंड हाउस और संस्थागत निवेशक (FIIs/DIIs) अपना पैसा आईटी से निकालकर बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग या ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टर्स में लगा रहे हैं।
निफ्टी 50 में आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी का 26 साल के निचले स्तर पर आना एक बड़ी घटना है। यह बताता है कि बाजार का चक्र (Market Cycle) कैसे घूमता है। जो सेक्टर कल तक बाजार का हीरो था, आज वह संघर्ष कर रहा है। फिलहाल, आईटी शेयरों में निवेश करने से पहले निवेशकों को बेहद सतर्क रहने और अपने वित्तीय सलाहकार से राय लेने की जरूरत है। बाजार की नजरें अब आगामी तिमाही नतीजों और वैश्विक संकेतों पर टिकी रहेंगी।
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डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल मार्केट अपडेट्स और रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह या निवेश की राय नहीं है। क्रिप्टो मार्केट और शेयर बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क जरूर करें।
